ख्वाबों के पन्नों पर…


ख्वाबों के पन्नों पर लिख रहा हूँ कविता
ख्वाबों के पन्नों पर लिख रहा हूँ कविता ।।
जाग जाऊं अगर तो पढलेना…
यादें शब्द हैं, ज़ज़्बात हैं अक्शर
समझ सको तो समझ लेना…
जाग जाऊं अगर तो पढलेना ।।
वो पन्नें थोड़े खुरदुरे हैं, थोड़े मुड़े
हो सके तो संजोलेना..
जाग जाऊं अगर तो पढलेना ।।
ज़मीन शुरुआत है, आसमान हैं अंत
चाँद सूरज क्या तारे हैं अनगिनत
गिन सको तो गिन लेना…
जाग जाऊं अगर तो पढलेना ।।
यह ख्वाब न पूरा था न हुआ
छोड़ रहा हूं अधूरा,
कर सको पूरा तो करदेना…
ख्वाबों के पन्नों पर लिख रहा हूं कविता…
जाग जाऊं अगर तो पढलेना।।

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हूँ मैं उदास ये किसने कहा ।।


न कुछ पाने को है….
न कुछ खोने को रहा…
हूँ मैं उदास ये किसने कहा ।।
जीने को साँसे हैं, कहने को यादें
आज तुम कहीं मैं कहाँ…
हूँ मैं उदास ये किसने कहा ।।
फूल थे खिले, कांटें थे कहीं…
रास्ता था कठिन, सफर था जवां
मंजिल थी कहीं और हम चल दिए कहाँ…
न कुछ पाने को है…
न कुछ खोने को रहा…
हूँ मैं उदास ये किसने कहा ।।

अब कोई नहीं रहता !!


मेरे दिल में…
अब कोई नहीं रहता !!
दस्तकें होती हैं, लेकिन
चुप ये रहता है,
ये उनसे कुछ नहीं कहता…
मेरे दिल में अब कोई नहीं रहता !!
खामोशी वहां रहती है,
जहाँ शोर था कभी मचता…
खुशियां बहती थीं पहले तो,
बस अब सिर्फ खून है बहता…
मेरे दिल में अब कोई नहीं रहता !!
दीवारें अब मैली हैं…
यादों की धूल जो फैली है…
कमजोर नहीं था दिल मेरा भी !!
पर कबतक वो यूँही सहता !!
मेरे दिल में अब कोई नहीं रहता !!
अँधेरे ही अँधेरे अब दिखने लगे हैं,
क़दमों के निशाँ थे जो, अब मिटने लगें हैं…
चहल-पहल रहती पहले तो !!
अब क्यों !! आहत से भी है डरता ??
मेरे दिल में अब कोई नहीं रहता !!
मेरे दिल में…
अब कोई नहीं रहता !!
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मुझे शौक था !!


जल गया खुद ही ख़्वाबों में अपने…
मुझे अंगारों से खेलने का शौक था !!
लूट गया खुद ही मोहब्बत में अपनी…
मुझे तुमसे दिल लगाने का शौक था !!
न मुकाम का पता था, ना अंजाम मालुम था !!
चलपड़ा था मै तो यूँही राहों पर…
मुझे सफर में खोजाने का शौक था !!
जमीन हूँ मै, आसमान तुम हो
काट ही लिए हवाओं ने पंख मेरे,
मुझे ऊँची उड़ान भरने का शौक था !!
निकला था मै तो साहिल पाने को \
बीच मझदार डूब गयी कश्ती मेरी,
मुझे लहरों से खेलने का शौक था !!
मालुम था मुझे की राहें जुदा है अपनी
क्या पता किस मोड़ पे मिलजाते तुम
मुझे किस्मत आजमाने का शौक था !!
जल गया खुद ही ख़्वाबों में अपने…
मुझे अंगारों से खेलने का शौक था !!
मुझे !! तुमसे दिल लगाने का शौक था…

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तुम थे !!


लम्हे वो प्यार के जिए थे जो, वजह तुम थे !!
ख्वाब जन्नत के सजाये थे जो, वजह तुम थे !!
दिल का करार तुम थे,
रूह की पुकार तुम थे…
मेरे जीने की वजह तुम थे !!
लबों पे हँसी थी जो , वजह तुम थे !!

आँखों में नमी थी जो, वजह तुम थे !!
रातों की नींद तुम थे,
दिन का चैन तुम थे…
मांगी थी जो रब से वो दुआ तुम थे !!
मेरी दीवानगी तुम थे,
मेरी आवारगी तुम थे…
बनाया मुझे शायर,
वो शायरी तुम थे !!
तुम थे तो हम थे,
मेरी जिंदगी तुम थे !!
ज़िन्दगी !! यूँ तो न थी 
तेरे आने से पहले
तेरे जाने के बाद
तुम थे तो ये शामें थी
जिसमे हम चाहत के पंख लगाए, 
आसमानो में उड़ते थे
दीवानगी !! यूँ तो न थी
तेरे आने से पहले 
तेरे जाने के बाद
तुम थे तो ये यादें थी !!
जिसमे हम तुम खोए हुए, 
ख्वाब सजाया करते थे
आवारगी !! यूँ तो न थी
तेरे आने से पहले 
तेरे जाने के बाद 
तुम थे तो ये रातें थी !!
जिसमे हम चांदनी में नहाये, 
तारों की सैर किया करते थे
सादगी !!यूँ तो न थी
तेरे आने से पहले 
तेरे जाने के बाद 
तुम थे तो वो बातें थी !!
जिसमे में हम हस्ते हुए,
खो जाया करते थे
मैं यूँ तो न था
तेरे आने से पहले
तेरे जाने के बाद
एक शाम वो थी, एक शाम ये है
ये हवाएं तब भी थी, ये घटायें तब भी थी
फर्क सिर्क इतना है
तब तुम थे !!!
एक रात वो थी, एक रात ये है
ये ख़ामोशी तब भी थी, ये चांदनी तब भी थी
फर्क सिर्क इतना है
चाँद तब तुम थे !!!
वो दिन भी थे जो बीत गए जो बीते थे साथ तेरे
अब तुम नही तो कुछ नही और क्या होगा साथ मेरे
ख्वाब ख्वाब में ख्वाब सजाकर ख्वाब जो मैंने देखे थे
वो ख्वाब सारे टूट गए, पल वो सारे रूठ गए
और मैं… अब ये सोचता हूँ
एक वो वक़्त था, एक ये वक़्त है
ये जुदाई तब न थी, ये तन्हाई तब न थी
हाँ तब तो हम खुश थे !! साथ मेरे…
जब तुम थे !!!
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चल मुसाफिर चल !!


चल मुसाफिर चल
चलते है तुझे रहना…
लहरों से खेल कर,
अब तुझे है बहना…
चल मुसाफिर चल,
चलते है तुझे रहना…
किस सोच में पड़ा तू !!
किस मोड़ पे खड़ा तू !!
अब खुद से बस ये कहना
चल मुसाफिर चल,
चलते है तुझे रहना…
ख्वाहिशें तमाम हैं,
पाना तुझे मुकाम है
अब चाहतों की आग में
जल कर भी तुझे है सहना
चल मुसाफिर चल,
चलते है तुझे रहना…
साथ क्या लाया था तू ??
लेकर क्या जाएगा !!
ये सफर ही है मुसाफिर ,
जो संग तेरे रह जाएगा
बैठ क्यों गया तू !!
किस सोच में पड़ा तू
उठ !! अभी मत रुकना
चल मुसाफिर चल,
चलते है तुझे रहना…
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तुमने पुकारा होगा


दिल मेरा धड़का है आज,
तुमने पुकारा होगा

अश्क़ का एक कतरा,
आँख से उतारा होगा
बरसेंगे बादल झूमके !!
आसमान को तो देखो,
रब का कोई तो इशारा होगा
दिल मेरा धड़का है आज,
तुमने पुकारा होगा !!
हवाओं में खुशबू है जो, तेरे साँसों की
फ़िज़ाओं में नमी है जो, तेरे आँखों की
बहक भी जाऊं अगर, तो यकीन है मुझे
कि तेरी बाहों का सहारा तो होगा !!
दिल मेरा धड़का है आज,
तुमने पुकारा होगा
आ चल चलें कहीं दूर….
यादों कि कश्ती में बैठके
तूफ़ान भी आ जाएं तो क्या
कहीं तो किनारा होगा !!
अश्क़ का एक कतरा,
आँखों से उतारा होगा
दिल मेरा धड़का है आज,
तुमने पुकारा होगा….

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इश्क़ न होता तो क्या होता


इश्क़ न होता तो क्या होता…
इश्क़ न होता तो क्या होता !!
माना तुम्हारे दीवाने हैं हज़ार
मैं भी दीवाना न होता तो क्या होता !!
इश्क़ न होता तो क्या होता
तुम जो मुस्कुराती रही
धड़कने मेरी बढ़ाती रही
दिन का चैन तो लूटा,
तुम ही बताओ रातों में भी मैं कैसे सोता !!

इश्क़ न होता तो क्या होता
लगते थे फीके सब रंग मुझे
वीराना था जग मेरा
था जबसे देखा तुम्हे,
रंगीन मेरा जहां न होता तो क्या होता
इश्क़ न होता तो क्या होता
इश्क़ न होता तो क्या होता ??
तुम न होते न मैं होता
वो बातें न होती वो रातें न होती
जब कहते थे आ चलें दूर कहीं…
वहां जहाँ बस हम-तुम और कोई न होता
इश्क़ न होता तो क्या होता
न ये कविता होती न मैं कवी होता
तुम न होते न मैं होता
इश्क़ न होता तो क्या होता….

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