ख्वाबों के पन्नों पर…


ख्वाबों के पन्नों पर लिख रहा हूँ कविता
ख्वाबों के पन्नों पर लिख रहा हूँ कविता ।।
जाग जाऊं अगर तो पढलेना…
यादें शब्द हैं, ज़ज़्बात हैं अक्शर
समझ सको तो समझ लेना…
जाग जाऊं अगर तो पढलेना ।।
वो पन्नें थोड़े खुरदुरे हैं, थोड़े मुड़े
हो सके तो संजोलेना..
जाग जाऊं अगर तो पढलेना ।।
ज़मीन शुरुआत है, आसमान हैं अंत
चाँद सूरज क्या तारे हैं अनगिनत
गिन सको तो गिन लेना…
जाग जाऊं अगर तो पढलेना ।।
यह ख्वाब न पूरा था न हुआ
छोड़ रहा हूं अधूरा,
कर सको पूरा तो करदेना…
ख्वाबों के पन्नों पर लिख रहा हूं कविता…
जाग जाऊं अगर तो पढलेना।।

Advertisements

हूँ मैं उदास ये किसने कहा ।।


न कुछ पाने को है….
न कुछ खोने को रहा…
हूँ मैं उदास ये किसने कहा ।।
जीने को साँसे हैं, कहने को यादें
आज तुम कहीं मैं कहाँ…
हूँ मैं उदास ये किसने कहा ।।
फूल थे खिले, कांटें थे कहीं…
रास्ता था कठिन, सफर था जवां
मंजिल थी कहीं और हम चल दिए कहाँ…
न कुछ पाने को है…
न कुछ खोने को रहा…
हूँ मैं उदास ये किसने कहा ।।