तुम थे !!


लम्हे वो प्यार के जिए थे जो, वजह तुम थे !!
ख्वाब जन्नत के सजाये थे जो, वजह तुम थे !!
दिल का करार तुम थे,
रूह की पुकार तुम थे…
मेरे जीने की वजह तुम थे !!
लबों पे हँसी थी जो , वजह तुम थे !!

आँखों में नमी थी जो, वजह तुम थे !!
रातों की नींद तुम थे,
दिन का चैन तुम थे…
मांगी थी जो रब से वो दुआ तुम थे !!
मेरी दीवानगी तुम थे,
मेरी आवारगी तुम थे…
बनाया मुझे शायर,
वो शायरी तुम थे !!
तुम थे तो हम थे,
मेरी जिंदगी तुम थे !!
ज़िन्दगी !! यूँ तो न थी 
तेरे आने से पहले
तेरे जाने के बाद
तुम थे तो ये शामें थी
जिसमे हम चाहत के पंख लगाए, 
आसमानो में उड़ते थे
दीवानगी !! यूँ तो न थी
तेरे आने से पहले 
तेरे जाने के बाद
तुम थे तो ये यादें थी !!
जिसमे हम तुम खोए हुए, 
ख्वाब सजाया करते थे
आवारगी !! यूँ तो न थी
तेरे आने से पहले 
तेरे जाने के बाद 
तुम थे तो ये रातें थी !!
जिसमे हम चांदनी में नहाये, 
तारों की सैर किया करते थे
सादगी !!यूँ तो न थी
तेरे आने से पहले 
तेरे जाने के बाद 
तुम थे तो वो बातें थी !!
जिसमे में हम हस्ते हुए,
खो जाया करते थे
मैं यूँ तो न था
तेरे आने से पहले
तेरे जाने के बाद
एक शाम वो थी, एक शाम ये है
ये हवाएं तब भी थी, ये घटायें तब भी थी
फर्क सिर्क इतना है
तब तुम थे !!!
एक रात वो थी, एक रात ये है
ये ख़ामोशी तब भी थी, ये चांदनी तब भी थी
फर्क सिर्क इतना है
चाँद तब तुम थे !!!
वो दिन भी थे जो बीत गए जो बीते थे साथ तेरे
अब तुम नही तो कुछ नही और क्या होगा साथ मेरे
ख्वाब ख्वाब में ख्वाब सजाकर ख्वाब जो मैंने देखे थे
वो ख्वाब सारे टूट गए, पल वो सारे रूठ गए
और मैं… अब ये सोचता हूँ
एक वो वक़्त था, एक ये वक़्त है
ये जुदाई तब न थी, ये तन्हाई तब न थी
हाँ तब तो हम खुश थे !! साथ मेरे…
जब तुम थे !!!
20160913_142614

Advertisements

ख्वाबों की दुनिया

मेरी कलम से...


ख़्वाबों में जो देखि थी दुनिया,
वो दुनिया कितनी हसीन थी
शांति थी चारो ओर
खुशियां ही हर जगह बिखरी थी
न थे ये सीमायों के मसले,
न थे ये धर्मो के संकट,
मुस्कान हर चेहरे पर खिली थी
ख़्वाबों में जो देखि थी दुनिया
वो दुनिया कितनी हसीन थी
न थे ये शोर शराबे,
न थे ये खून खराबे,  
इंसानो के दिलो में इंसानियत दिखी थी
ख़्वाबों में जो देखि थी दुनिया
वो दुनिया कितने हसीन थी
मगर ये दुनिया !!
ये दुनिया हिन्दू-मुसलमान की,
ये दुनिया भारत-पाकिस्तान की,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है !!
ये दुनिया तो न थी उन ख़्वाबों में
यहाँ तो हर रोज जवान मरते हैं,
यहाँ तो इंसान ही इंसानो से डरते हैं
न कभी उन ख़्वाबों के टूटने की उम्मीद थी
ख़्वाबों में जो देखि थी दुनिया,
वो दुनिया कितनी हसीन थी
20160913_142614
International Day of Peace
21 September

View original post

चल मुसाफिर चल !!


चल मुसाफिर चल
चलते है तुझे रहना…
लहरों से खेल कर,
अब तुझे है बहना…
चल मुसाफिर चल,
चलते है तुझे रहना…
किस सोच में पड़ा तू !!
किस मोड़ पे खड़ा तू !!
अब खुद से बस ये कहना
चल मुसाफिर चल,
चलते है तुझे रहना…
ख्वाहिशें तमाम हैं,
पाना तुझे मुकाम है
अब चाहतों की आग में
जल कर भी तुझे है सहना
चल मुसाफिर चल,
चलते है तुझे रहना…
साथ क्या लाया था तू ??
लेकर क्या जाएगा !!
ये सफर ही है मुसाफिर ,
जो संग तेरे रह जाएगा
बैठ क्यों गया तू !!
किस सोच में पड़ा तू
उठ !! अभी मत रुकना
चल मुसाफिर चल,
चलते है तुझे रहना…
20160913_142614

 

तुमने पुकारा होगा


दिल मेरा धड़का है आज,
तुमने पुकारा होगा

अश्क़ का एक कतरा,
आँख से उतारा होगा
बरसेंगे बादल झूमके !!
आसमान को तो देखो,
रब का कोई तो इशारा होगा
दिल मेरा धड़का है आज,
तुमने पुकारा होगा !!
हवाओं में खुशबू है जो, तेरे साँसों की
फ़िज़ाओं में नमी है जो, तेरे आँखों की
बहक भी जाऊं अगर, तो यकीन है मुझे
कि तेरी बाहों का सहारा तो होगा !!
दिल मेरा धड़का है आज,
तुमने पुकारा होगा
आ चल चलें कहीं दूर….
यादों कि कश्ती में बैठके
तूफ़ान भी आ जाएं तो क्या
कहीं तो किनारा होगा !!
अश्क़ का एक कतरा,
आँखों से उतारा होगा
दिल मेरा धड़का है आज,
तुमने पुकारा होगा….

20160913_142614


See more on pennpoets.com
Sign up for pennpoets.com and share your poems with the world & shine in the ocean of poetry