सोचता हूँ


सोचता हूँ मैं क्या देखूं
सूरज देखूं या चाँद देखूं,
धरती देखूं या आसमां देखूं,
तारे देखूं या नजारे देखूं,
फूल देखूं या बहार देखूं,
कोई नही है तुझसा यहाँ,
तेरे सिवा मैं क्या देखूं
सोचता हूँ मैं क्या देखूं
इन हवाओं में तू,
इन फ़िज़ाओं में तू,
मेरी हर दुआ में तू
अब ये बादल देखूं या बारिश देखूं
लहरें देखूं या सागर देखूं
एक ख्व्वाब है तू
तुझे देखूं या ख्वाब देखूं
सोचता हूँ मैं क्या देखूं
20160913_142614

 

Advertisements

इन्तेजार


आँखों से नींद अब जाती नही,
तेरे ख़्वाबों का इन्तेजार है
साँसों में अब वो खुशबू आती नही,
तेरे आने का इन्तेजार है
डर लगता है अब सफर में,
कहीं खो न जाऊं मैं
आ कर थामले मुझे,
तेरा इन्तेजार है
20160913_142614

 

बयां मैं कैसे करूँ !!


दो लफ्ज़ की कहानी थी वो,
बयां मैं कैसे करूँ !!
एक पल मिलना था,
दूजे पल बिछड़ना
बयां मैं कैसे करूँ !!
दो जिस्म एक जान थे हम, 
एक दूजे के जहां थे हम
जब मिलना था तो बिछड़े क्यों  
अब ये सज़ा मैं कैसे सहूँ !!
दो लफ्ज़ की कहानी थी वो,
बयां मैं कैसे करूँ !!
ये सच भी मैंने माना था
आग का दरिया था,
और डूब के जाना था
कितने खुश थे हम
मैं शब्दों में कैसे कहूँ !!
दो लफ्ज़ की कहानी थी वो,
बयां मैं कैसे करूँ !!
20160913_142614