रुख से पर्दा(ग़ज़ल)

Today i was listening to this beautiful ghazal, and decided to share with you all. It is a very beautiful ghazal by king of ghazals Jagjit Singh. I’ve also provided link for the song, please listen to it 🙂

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रुख से पर्दा उठादे जरा साकिया
बस अभी रंग ए महफ़िल बदल जाएगा
है जो बेहोश वो, होश में आएगा
गिरने वाला है जो, वो संभल जाएगा
रुख से पर्दा उठादे
तुम तस्सली न दो, सिर्फ बैठे रहो
वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जाएगा
क्या ये कम है, मसीहा के रहने ही से
मौत का भी इरादा बदल जाएगा
रुख से पर्दा उठादे
तीर की जान है दिल, दिल की जान तीर है
तीर को यूँ न खींचो, कहाँ मान लो
तीर खींचा तो दिल भी निकल आएगा,
दिल जो निकल तो, दम भी निकल जाएगा
रुख से पर्दा उठादे
इसके हँसने में रोने का अंदाज़ है,
ख़ाक उड़ाने में फ़रियाद का राज है
इसको छेड़ो न अनवर खुदा के लिए,
वरना बीमार का दम निकल जाएगा
रुख से पर्दा उठादे जरा साकिया,
बस अभी रंग ए महफ़िल बदल जाएगा
है जो बेहोश वो, होश में आएगा
गिरने वाला है जो, वो संभल जाएगा

              Ghazal by: Jagjit Singh
         Written by: Jagjit singh, Anwar Mirza Puri 

 

8 thoughts on “रुख से पर्दा(ग़ज़ल)

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